बदायूं
अभी तक तो छोटी छोटी घटनाएं जैसे किसी कार्यकर्ता का बन्द कर देना चैकिंग के दौरान आम जनमानस और कार्यकर्ताओं से जान बूझ कर बदतमीजी करना मारपीट और चालान काटना छोटे मोटे कार्यकर्ता पिटे किसी को पता ही नहीं चला बेचारे पिट कुट के चुपचाप अपने घर बैठ गए क्योंकि अगर उन्होने अपने नेता या विधायक से शिकायत की तो उसने उन्हें चार उल्टी सुनाई और बताया प्रशासन बहुत अच्छा कार्य कर रहा है तुम लोग अनुशासन में नहीं रहते हो अनुशासन में रहो और प्रशासन का सहयोग करो फिर नम्बर आया थोड़े बड़े नेताओं का तब कुछ हलचल हुई दो चार दिन हो हल्ला मचा फिर से शान्ति हो गई परन्तु अब तो हद ही हो गई पुलिस ने अपनी सारी हदें पार करते हुए मौजूदा विधायक बो भी सत्ता सरकार में को ही कूट डाला और इतना कूटा कि कपड़े तक फट गए विधायक जी को मीडिया को खुद बताना पड़ा कि मुझे 3 दरोगाओं ने मिलकर थाने में मारा और इतना मारा कि मेरे कपड़े भी फट गये
भारतीय जनता पार्टी की सरकार में पुलिस -प्रशासन किस कदर हावी है जो एक पूर्व नहीं मौजूदा विधायक को मीडिया में बताना पड़ रहा है मुझे थाने में 3 दरोगाओं ने मिलकर मारा सिर्फ इसलिए कि वो किसी कार्यकर्ता की शिकायत पर थाने गये थे, समझ नही आता ये साथ में दो गनर किस लिए दिये जाते हैं सिर्फ शक्ल देखने को या दिखाने को?
ऐसा कभी आपने किसी और पार्टी की सरकार में सुना कि किसी सत्तासीन विधायक को कोई थानेदार मारे?
इसलिए कार्यकर्ता भी परेशान हैं कि जब विधायक जी खुद को नही बचा पा रहे हैं तो फिर आम आदमी या कार्यकर्ता का क्या होगा
माननीय मुख्यमंत्री जी ने जो अधिकारियों को सीधे सीधे कमान दे दी है मुझे बहुत दुखित मन से ये कहना पड़ रहा है कि इसी बजह से सरकार शायद बापसी नही कर पायेगी,
क्योंकि सुनी केवल अधिकारियों की जायेगी अगर विधायक जी ने कोई एक्शन ले लिया तो कार्रवाई उन्हीं पर होनी तय है जबकि सही रिपोर्ट विधायक ही दे सकते हैं क्योंकि विधायक जनता के सम्पर्क में रहते हैं न कि प्रशासन
ऐसे में आम आदमी में क्या संदेश जाता होगा सांसद आये दिन धरना दे रहे हैं कोई सुनने वाला ही नहीं है
कार्यकर्ता को जब किसी मामले में विधायक बचा ही नही पायेंगे तो वो चुनाव ही क्यों लड़ाएंगे?
ये सरकार को अत्यन्त सोचनीय विषय है।

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