ज्योतिषाचार्य पंडित अर्जुन उपाध्याय की कलम से
भगवान श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था।
लेकिन अनेकों बार ऐसी स्थिति वन जाती है अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों एक ही दिन नही होते।इस बार भी कृष्ण जन्म तिथि और नक्षत्र एक साथ नहीं मिल रहे हैं 11 अगस्त को सुबह 9:00 बज कर 7 मिनट के बाद अष्टमी तिथि का आरंभ हो जाएगा जो 12 अगस्त को 11:00 बज कर 17 मिनट तक रहेगी वही रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 13 अगस्त को सुबह 3:00 बजकर 27 मिनट से 5:00 बज कर 22 मिनट तक रहेगा शास्त्रों में इस तरह उलझन के लिये एक आसान सा उपाय बताया गया है। कि ग्रहस्थों को उस दिन व्रत रखना चाहिये जिस रात को अष्टमी तिथि लग रही है।पंचांग के अनुसार ,11 अगस्त दिन मंगलवार को ग्रहस्थ आश्रम के लोगों को जन्माष्ठमी का पर्व मनाना सही रहेगा क्योंकि 11 की रात को अष्ठमी है। ग्रहस्थ लोग रात में चन्द्रमा को अर्ध्य दें,
दान और जागरण कीर्तन करें और 12 अगस्त को व्रत का पारण करें। और कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाएं जोकि श्रेष्ठ एवं उत्तम रहेगा वहीं जो लोग वैष्णव व साधु संत है उनको 12 अगस्त को व्रत रख सकते है।12 अगस्त को सुबह 11 बजकर 17 मिनट अष्ठमी तिथि रहेगी और उसके बाद नवमी तिथि लग जायेगी

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